Question क) भारत में मीट्रिक प्रणाली कब अपनाई गई ? उससे क्या हुआ ?
Answer: भारत में 1956 में मीट्रिक प्रणाली अपनाई गई। इससे नाप-तौल की एक समान और व्यवस्थित प्रणाली लागू हुई और इंच-फुट की जगह सेंटीमीटर और मीटर का उपयोग शुरू हो गया।
Question ख) मौट्रिक प्रणाली में खेत नापने की इकाई क्या हैं?
Answer: मीट्रिक प्रणाली में खेत नापने की इकाइयाँ मीटर, आरे और हेक्टेयर हैं।
Question ग) अठारहवीं शताब्दी में बनी समिति में किन्हें शामिल किया गया? समिति में किस बात पर सहमति बनी ?
Answer: समिति में वैज्ञानिक लावॉयजिए और गणितज्ञ लायेंज को शामिल किया गया।
समिति ने यह तय किया कि नई मापन प्रणाली दशमलव प्रणाली पर आधारित होगी और उसकी इकाई मीटर होगी।
[2] सही कथन के आगे का चिह्न और गलत कथन के आगे ✔ का चिह्न लगाइए-
Question क) आज भी हमारे पास नापजोख की एक व्यवस्थित प्रणाली नहीं है।
Answer: ✗ गलत
Question ख) इमारती लकड़ी का व्यापार पूरी तरह इंच और फुट के आधार पर होता है।
Answer: ✓ सही
Question ग) हाथ की इकाई से गड़बड़ी और लड़ाई-झगड़े की संभावना बनी रहती है।
Answer: ✓ सही
Question घ) पहले जमीन की नाप के लिए पेड़ों का उपयोग किया जाता था।
Answer: ✗ गलत
Question ङ) मीट्रिक प्रणाली में खेत नापने की इकाई मीटर और हेक्टेयर हैं।
Answer: ✓ सही
[3] संक्षिप्त प्रश्नोत्तर -
Question क) पुराने जमाने से ही व्यक्ति को नापतोल करने की आवश्यकता क्यों पड़ी ?
Answer: पुराने समय से ही मनुष्य को अनाज, कपड़े, जमीन और वस्तुओं के लेन-देन के लिए नापतोल की आवश्यकता पड़ती थी।
Question ख) लगभग पचास वर्ष पहले तक लंबाई नापने की कौन-सी प्रणाली रही है?
Answer: लगभग पचास वर्ष पहले तक लंबाई नापने के लिए इंच और फुट प्रणाली का उपयोग किया जाता था।
Question ग) नापजोख की दुनिया में राजा हेनरी प्रथम की क्या भूमिका रही है?
Answer: राजा हेनरी प्रथम ने अपनी नाक के सिरे से दाहिने हाथ के अंगूठे तक की दूरी को एक गज मानकर उसे नाप की मानक इकाई घोषित किया।
[4] विस्तृत प्रश्नोत्तर -
Question क) नापजोख के लिए बीजों का उपयोग कैसे किया जाता था?
Answer: प्राचीन समय में बीजों का उपयोग भार और जमीन की नाप के लिए किया जाता था। भारत में रत्ती के बीज से सोना तौला जाता था। बेबीलोन में खेत की नाप इस आधार पर की जाती थी कि उसमें कितने बीज बोए जा सकते हैं।
Question ख) दो-ढाई हजार वर्ष पहले मध्यपूर्व में नाप के विषय में क्या धारणा थी ?
Answer: मध्य-पूर्व में दो प्रकार की नाप होती थीं — साधारण नाप और शाही नाप। राजा जब कर (टैक्स) लेता था तो शाही नाप का उपयोग करता था और जब जनता को कुछ देता था तो साधारण नाप से देता था, जिससे जनता को नुकसान होता था।
Question ग) नापजोख को व्यवस्थित करने में फ्रांस की भूमिका पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: नापजोख को व्यवस्थित करने में फ्रांस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अठारहवीं शताब्दी में वहाँ वैज्ञानिकों की एक समिति बनाई गई जिसने दशमलव प्रणाली पर आधारित मीट्रिक प्रणाली विकसित की। 1799 में फ्रांस में इसे लागू किया गया और बाद में यह प्रणाली पूरी दुनिया में प्रचलित हो गई।
Question 2: निम्नलिखित शब्दों के मूल शब्द और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
Answer:
क) लंबाई = लंबा + आई
ख) उपयोगी = उपयोग + ई
ग) चौड़ाई =चौड़ा + आई
घ) काल्पनिक= कल्पना + इक
ङ) वैज्ञानिक = विज्ञान +इक
च) पारंपरिक =परंपरा + इक
[ 3.] अर्थ लिखकर अंतर स्पष्ट कीजिए:
Answer: 3. अर्थ लिखकर अंतर स्पष्ट कीजिए:
ये 'श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द' हैं (सुनने में समान पर अर्थ अलग)।
क) बात: चर्चा या वचन / वात: हवा (वायु)
ख) गज: हाथी / गज़: नाप की एक इकाई (जैसे कपड़ा नापना)
ग) बारह: एक संख्या (12) / बाहर: भीतर का विलोम (Out)
घ) तह: परत (Layer) / तय: निश्चित करना (Decided)
ङ) वदन: मुख (Face) / बदन: शरीर (Body)
च) सामान: वस्तुएँ या चीजें / समान: बराबर (Equal)
[4.] निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति क्रिया विशेषण शब्दों से कीजिए-
Question क) नापजोख करने के तरीके और साधनों में एकरूपता ..............आई।
(रीतिवाचक क्रिया विशेषण)
Answer: धीरे-धीरे
Question ख) लोग आज भी पारंपरिक साधनों का इस्तेमाल ................ करते हैं।
(परिमाणवाचक क्रिया विशेषण)
Answer: बहुत
Question ग) किसान .................घर आ जाते हैं।
(कालवाचक क्रिया विशेषण)
Answer: शाम को
Question घ) ............कूड़ा नहीं फेंकना चाहिए।
(स्थानवाचक क्रिया विशेषण)
Answer: यहाँ
Question ङ) ..........इमारत गिर गई।
(रीतिवाचक क्रिया विशेषण)
Answer: अचानक
[E] अनुच्छेद लेखन
नाप-तोल की प्रणाली के विकास क्रम की भाँती 'मुद्रा के क्रमिक विकास' के विषय में एक अनुच्छेद लिखिए
Answer: प्राचीन समय में वस्तुओं के लेन-देन के लिए लोग वस्तु-विनिमय प्रणाली का उपयोग करते थे। इस प्रणाली में एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु दी जाती थी, जैसे अनाज के बदले कपड़ा या दूध के बदले फल। समय के साथ यह प्रणाली कठिन साबित होने लगी, क्योंकि हर वस्तु की सही कीमत तय करना मुश्किल था। इसलिए धीरे-धीरे धातु के सिक्कों का प्रयोग शुरू हुआ। सोना, चाँदी और तांबे के सिक्के व्यापार में इस्तेमाल किए जाने लगे। बाद में कागज़ के नोटों का प्रचलन बढ़ा, जिससे लेन-देन और भी आसान हो गया। आधुनिक समय में तकनीक के विकास के साथ-साथ डिजिटल भुगतान, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सुविधाएँ भी आ गई हैं। इस प्रकार समय के साथ मुद्रा की प्रणाली में लगातार विकास होता गया और आज यह व्यापार और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार बन गई है।