Solutions For Class 8 Hindi


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Solutions For Class 8 Hindi 2026-27

Teacher Amrendra Singh Call @ 8967311377

अध्याय 1. स्नेह शपथ (कविता) भवानीप्रसाद मिश्र

1. निम्नलिखित प्रश्नों के मौखिक उत्तर दीजिए—

प्रश्न - 1 क) 'स्नेह-शपथ' कविता के कवि कौन हैं?

उत्तर : स्नेह-शपथ' कविता के कवि भवानी प्रसाद मिश्र हैं

प्रश्न - 1 ख) हर जगह क्या जा सकता है? या हर जगह क्या भर सकता है?

उत्तर : कविता के भाव के अनुसार, 'स्नेह' (प्रेम) हर जगह जा सकता है और हर जगह (दिलों के खालीपन को) भर सकता है। प्रेम या मधुर व्यवहार के माध्यम से किसी भी व्यक्ति का हृदय जीता जा सकता है और कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी सुधारा जा सकता है।

प्रश्न - 1 ग) कवि सख्त बात के स्थान पर किससे काम लेने की बात कह रहे हैं?​

उत्तर : भवानीप्रसाद मिश्र की कविता 'स्नेह शपथ' में कवि सख्त बात के स्थान पर प्रेम, स्नेह और मधुर वचनों (मृदुभाषा) से काम लेने की बात कह रहे हैं। कवि का मानना है कि कठोर वाणी के बजाय स्नेहपूर्वक व्यवहार से किसी को भी जीता जा सकता है और बिगड़े काम बनाए जा सकते हैं।

2. सही उत्तर पर (✓) का चिह्न लगाइए—

प्रश्न - 2 क) किसके यश पर धूल उड़ने की बात की गई है?

उत्तर : (ii) परिचित या अपरिचित (✓)

प्रश्न - 2 ख) गलत रास्ते पर चलने वाले को कैसे वचनों से समझाया जाना चाहिए?

उत्तर : (ii) मृदु (✓)

प्रश्न - 2 ग) क्या प्रेम को सीमाओं में बाँधा जा सकता है?

उत्तर : (ii) नहीं (✓)

प्रश्न - 2 घ) कवि किसकी शपथ लेने का आग्रह कर रहे हैं?

उत्तर : (iii) करुणाकर की (✓)

प्रश्न - 2 ङ) कविता में 'अंतर' का अर्थ क्या है?

उत्तर : (ii) हृदय (✓)

3. संक्षिप्त प्रश्नोत्तर

प्रश्न - 3 (क) दुष्ट व्यक्ति किस स्थिति में भावुक हो उठता है?

उत्तर : जब दुष्ट व्यक्ति को अपार प्रेम, करुणा और मृदु वचनों का सामना करना पड़ता है, तब उसका कठोर हृदय भी पिघल जाता है और वह भावुक हो उठता है।

प्रश्न ->प्रश्न - 3 (ख) कवि किस शपथ की बात करते हैं? क्यों?

उत्तर : कवि करुणाकर (ईश्वर) या मानवता की शपथ लेने की बात करते हैं ताकि मनुष्य अपने अहंकार को त्याग कर प्रेम और भाईचारे के मार्ग पर चल सके।

प्रश्न ->प्रश्न - 3 (ग) 'अपने अंतर का नेह' से क्या आशय है?

उत्तर : इसका आशय अपने हृदय के भीतर छिपे हुए निस्वार्थ प्रेम और स्नेह से है, जिसे दूसरों के प्रति प्रकट करना चाहिए।

4. विस्तृत प्रश्नोत्तर

प्रश्न - 4 (क) सख्त बात से क्या अभिप्राय है? इसके क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर : 'सख्त बात' का अर्थ है कठोर, कड़वे या अपमानजनक शब्द। इसके परिणाम स्वरूप आपसी रिश्तों में खटास आती है, शत्रुता बढ़ती है और व्यक्ति का हृदय आहत होता है।

प्रश्न - 4 (ख) पथभ्रष्ट व्यक्ति को क्या नुकसान पहुँचता है? उसे रास्ते पर कैसे लाया जा सकता है?

उत्तर : पथभ्रष्ट व्यक्ति समाज में अपना सम्मान खो देता है और पतन की ओर जाता है। उसे डाँट-फटकार के बजाय प्रेम, सहानुभूति और मीठे वचनों (मृदु व्यवहार) से सही रास्ते पर लाया जा सकता है।

प्रश्न - 4 (ग) 'प्रेम की शक्ति असीमित है'—स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : प्रेम वह शक्ति है जो शत्रु को भी मित्र बना सकती है। प्रेम के माध्यम से कठिन से कठिन कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं और किसी भी हृदय को जीता जा सकता है, इसलिए इसकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है।

प्रश्न - 4 (घ) भाव स्पष्ट कीजिए— (i) जो गिरे हुए को उठा सके, इससे प्यारा कुछ जतन नहीं।

उत्तर : भाव: संसार में सबसे पुण्य का काम गिरे हुए (असहाय या मार्ग से भटके हुए) व्यक्ति को सहारा देना और उसे सही दिशा दिखाना है। इससे श्रेष्ठ कोई मानवीय प्रयास नहीं है।

प्रश्न - 4 (घ) भाव स्पष्ट कीजिए— (ii) हर एक धृष्टता के कपोल, आँसू से गीले होते हैं।

उत्तर : भाव: जब किसी अहंकारी या ढीठ व्यक्ति को प्रेम और करुणा का अहसास होता है, तो उसका अहंकार आँसुओं के रूप में बह निकलता है और वह पश्चाताप करने लगता है।

प्रश्न - पत्र लेखन आपका छोटा भाई कुसंगति का शिकार हो गया है, उसे समझाते हुए पत्र लिखिए।

उत्तर : परीक्षा भवन,
[आपका शहर]
दिनांक: २३ मार्च, २०२६
प्रिय अनुज [भाई का नाम],
सदा खुश रहो।
कल मुझे पिताजी का पत्र मिला और यह जानकर बहुत दुःख हुआ कि तुम्हारा मन अब पढ़ाई में नहीं लग रहा है और तुम कुछ गलत संगत वाले लड़कों के साथ समय बिता रहे हो।

मेरे भाई, कुसंगति उस कीचड़ के समान है जो इंसान के चरित्र और भविष्य दोनों को बर्बाद कर देती है। एक बार गलत आदतें लग जाएँ, तो उनसे बाहर निकलना बहुत कठिन होता है। अभी तुम्हारी पढ़ने-लिखने की उम्र है। माता-पिता ने बहुत उम्मीदों के साथ तुम्हें पढ़ने भेजा है।

मुझे पूरा विश्वास है कि तुम अपनी गलती सुधारोगे और उन लड़कों का साथ छोड़कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दोगे। याद रखना, अच्छी संगति ही हमें जीवन में सफलता की ओर ले जाती है।
तुम्हारा बड़ा भाई,
[आपका नाम]

प्रश्न - कविता लेखन भवानीप्रसादः मिश्र की कविता 'भाईचारा' पढ़िए और लिखिए।

उत्तर : हो मित्र या कि शत्रु हो, परिचित हो या कि अपरिचित हो,
तुम जिसे भी देख रहे हो, वह यदि राह भूल गया हो,
तो उसे तुम स्नेह से राह दिखाओ।
कटु वचन न कहो, न उसे तुम दंड दो,
बस उसे एक बार प्यार से पुकारो।
स्नेह की शपथ देकर, उसे फिर से इंसान बनाओ।

अनुच्छेद लेखन करुणा एवं स्नेह भावों पर प्रकाश डालते हुए 'प्रेम अथवा कठोरता' विषय पर अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर प्रेम अथवा कठोरता: मानव जीवन में 'प्रेम' और 'कठोरता' दोनों के अपने महत्व हैं, लेकिन जो स्थान प्रेम का है, वह कठोरता कभी नहीं ले सकती। करुणा और स्नेह वे कोमल भाव हैं जो शत्रु को भी मित्र बना देते हैं। जहाँ कठोरता से हम किसी को डराकर काम करवा सकते हैं, वहीं प्रेम से हम किसी का हृदय जीत सकते हैं। प्रेम में वह शक्ति है जो घृणा को समाप्त कर समाज में शांति लाती है। यदि हम दूसरों के प्रति स्नेह और दया का भाव रखेंगे, तो बदले में हमें भी वही प्राप्त होगा। कठोरता अक्सर रिश्तों में दरार पैदा करती है, जबकि प्रेम और सहानुभूति रिश्तों को सींचकर उन्हें मज़बूत बनाते हैं। अतः हमें अपने व्यवहार में कठोरता के स्थान पर प्रेम और करुणा को प्रधानता देनी चाहिए।

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